रहमान के खिलाफ आयकर की याचिका, सितारों का धन रडार पर


-दिनेश ठाकुर
किसी दूसरी इंडस्ट्री को साल-दर-साल घाटा होता रहे तो उसका भट्ठा बैठ जाए, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। हर साल करीब 90 फीसदी फिल्में घाटे का सौदा साबित होती हैं, फिर भी उसकी चमक-दमक बदस्तूर कायम है। सितारों का मेहनताना और फिल्मों की लागत करोड़ों में पहुंच चुकी है। इस इंडस्ट्री में इतना धन कहां से आता है, यह आर्थिक पंडितों के लिए भी अबूझ पहेली है। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय समय-समय पर इस धन के हिसाब-किताब की जांच-पड़ताल करते रहते हैं। ऐसे ही एक मामले की जांच के बाद आयकर विभाग ने दक्षिण के मोजार्ट ए.आर. रहमान के खिलाफ शुक्रवार को मद्रास हाइकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि वे गैर-लाभ वाले संगठन ए.आर. रहमान फाउंडेशन का इस्तेमाल अपनी आय को कर से बचाने के लिए कर रहे हैं। याचिका के मुताबिक रहमान ने ब्रिटेन की एक मोबाइल कंपनी के लिए रिंगटोन्स तैयार की थीं, जिसके मेहनताने के 3.47 करोड़ रुपए उन्होंने कंपनी से सीधे इस फाउंडेशन को अदा करवाए, क्योंकि चैरिटेबल ट्रस्ट की आय पर कर नहीं देना पड़ता। याचिका को मंजूर कर हाइकोर्ट ने रहमान को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।

अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, सलमान खान, ऋतिक रोशन, करीना कपूर और दीपिका पादुकोण समेत चंद सितारों की तरफ से आयकर समय पर भरने की सुर्खियों से इतर हकीकत यह है कि फिल्म वालों और आयकर विभाग के बीच ‘तू डाल-डाल मैं पात-पात’ का खेल कई साल से चल रहा है। किशोर कुमार के कई किस्से मशहूर हैं कि आयकर विभाग से बचने के लिए वे कैसे-कैसे तरीके आजमाया करते थे। वे इस विभाग को अपना ‘सबसे बड़ा सिरदर्द’ बताते थे। ‘आंसू और मुस्कान’ (1971) के गाने ‘गुणी जनो रे भक्त जनो’ में उनके आग्रह पर ये पंक्तियां विशेष रूप से जोड़ी गई थीं- ‘जगत नारायण को छोड़ के संतों/ नगद नारायण के सब हैं यारम/ इन सबके पीछे पड़ गया इनकम टैक्सम्/ बम बम नाचे किशोर कुमारम्/ जय गोविंदम् जय गोपालम्।’ किशोर कुमार उम्रभर आयकर विभाग को छकाते रहे। एक बार उनके बंगले में उनसे इंटरव्यू के दौरान एक पत्रकार ने कुछ बदहाल फाइलों को देखकर सवाल किया तो उन्होंने कहा- ‘ये आयकर की फाइलें हैं। इन्हें चूहे कुतरते रहते हैं और मर जाते हैं। ये अच्छी कीटनाशक साबित हो रही हैं।’

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रेखा के बकाया आयकर का मामला 1986 में सुर्खियों में रहा था। उन्होंने तत्कालीन केंद्र सरकार की क्षमादान योजना के तहत पिछले 12 साल की अपनी 25 लाख रुपए की आय और घोषित की थी, लेकिन उन्हें माफी देने के बजाय आयकर विभाग ने तिगुनी रकम (75 लाख रुपए) जमा करवाने को कहा। समय-समय पर फिल्मी हस्तियों के ठिकानों पर आयकर विभाग छापे मारता है। अधिकृत तौर पर इनके नामों का खुलासा नहीं किया जाता, इसलिए इनकी उजली छवि पर कोई आंच नहीं आती। ज्यादातर सितारे अपनी करोड़ों की कमाई के दस्तावेज ठोक-बजाकर तैयार करवाते हैं, ताकि गड़बड़ी पकड़े जाने की गुंजाइश नहीं रहे। शरर कश्मीरी याद आते हैं- ‘परदे के पीछे भी घर-घर परदे हैं/ जाने क्या बस्ती के लोग छिपाते हैं।’





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