फिल्म ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ के नौ साल पूरे होने पर डायरेक्टर अली अब्बास जफर अपनी पहली फिल्म बनाने के सफर को याद किया। डायरेक्टर अली अब्बास जफर ने ‘सुल्तान’ और ‘टाइगर जिंदा है’ जैसी सुपरहिट फिल्में भी दीं, जिन्होंने 300 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। अली मूल रूप से देहरादून के निवासी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआत यशराज फिल्म्स (वाईआरएफ) से की, जहां उन्होंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर बॉलीवुड में अपने सफर की शुरुआत की और धीरे-धीरे डायरेक्टर बन गए।

अली ने कहा,’एक असिस्टेंट डायरेक्टर से डायरेक्टर बनने तक की मेरी यात्रा बड़ी रोमांचक थी और यकीनन थोड़ा फिल्मी भी रही है। मैं वाईआरएफ की ‘झूम बराबर झूम’, ‘बदमाश कंपनी’, ‘न्यूयॉर्क’ और ‘टशन’ में असिस्टेंट डायरेक्टर था और इसी दौरान मैं अपनी फिल्में भी लिखता जा रहा था। तो जैसे ही मैंने ‘बदमाश कंपनी’ का काम खत्म किया तो आदि को एक स्क्रिप्ट पकड़ा दी।’ उन्होंने आगे कहा,’एक दिन जब मैं कुछ दोस्तों के साथ कार में गोवा की तरफ जा रहा था तो आदि ने मुझे कॉल करके कहा कि उन्होंने मेरी स्क्रिप्ट पढ़ ली है और उनकी नजर में यह काफी बढ़िया है। इसमें मामूली बदलाव की जरूरत है, जिसके बाद हम इस पर काम शुरू कर देंगे। मैं तो इतना ही कहूंगा कि मेरे लिए किसी चमत्कार जैसा घटित हुआ। बड़ा दिलचस्प और लुभावना अनुभव रहा और इस इंडस्ट्री में पूरी तरह से एक आउटसाइडर होते हुए भी वाईआरएफ की कोई फिल्म डायरेक्ट करने का मौका मिलना। उस पर कैटरीना, इमरान और आदि के साथ काम करना किसी आशीर्वाद और वरदान से कम नहीं था!’

‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ की शूटिंग के दौरान अली की कैटरीना से अच्छी दोस्ती हो गई। इस बारे में अली ने कहा,’कैटरीना और मैं अब चाक एंड चीज की तरह हैं! बेशक हम बेस्ट फ्रेंड हैं, लेकिन हमारे मतभेद भी चलते रहते हैं। यही चीज है जो हमारी रिलेशनशिप को रियल और रेलीवेंट बनाए रखती है। आपको खुद के साथ सच्चा बने रहने की जरूरत होती है और खासकर जब आपके करीबी दोस्त बन जाते हैं तो आपको उनके साथ ईमानदारी बरतना चाहिए। मैंने हमेशा अपनी पूरी ताकत लगाकर उनके लिए काम किया है और उन्होंने भी हर तरह से बल भर मेरा साथ दिया है।’ अली आगे कहते हैं, ‘जब कैटरीना ने ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ के लिए हां की, तो कागज पर उनका रोल बड़ा स्ट्रॉन्ग था। उस वक्त मैं पूरी तरह से एक न्यूकमर था और वह अपनी सफलता के घोड़े पर सवार थीं। उस वक्त फिल्में ऑफर करने वाले दिग्गज फिल्ममेकरों पर मुझे तरजीह देना उनकी उदारता थी, लेकिन यह एक साहसपूर्ण निर्णय भी था। उसके बाद से आज तक हम प्रोफेशनल दोस्त होने की बजाए व्यक्तिगत दोस्ती निभाते चले आ रहे हैं। तो हां, मेरे लिए हमेशा हाजिर रहने के लिए शुक्रिया कैटरीना! मेरी जिंदगी में आपकी मौजूदगी अद्भुत है!’अली ने कहा,’मेरे ब्रदर की दुल्हन’ से लेकर ‘टाइगर जिंदा है’ तक वाईआरएफ के साथ काम करने के मेरे निजी अनुभव रहे हैं। मुझे लगता है कि एक डायरेक्टर के रूप में वहां पूरी रचनात्मक छूट मिली हुई थी। वाईआरएफ में बतौर फिल्म-मेकर मुझे अपनी आवाज मिल गई।





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