-दिनेश ठाकुर
मुजफ्फर अली से एक बार पूछा गया था कि उन्होंने ‘उमराव जान’ ( Umrao Jaan Movie ) के लिए रेखा ( Rekha ) को ही क्यों चुना, तो उनका जवाब था- ‘उनकी आंखों में टूटने और खुद को समेटने का तजुर्बा झलकता है। उनकी मजबूती की जड़े उनके अतीत में हैं।’ कोई शक नहीं कि शख्सीयत और अभिनय में बुलंदी रेखा ने जिंदगी के कई दुर्गम रास्तों तथा दलदल से होकर हासिल की। हॉलीवुड की अभिनेत्री सोफिया लॉरेन और रेखा में कई समानताएं हैं। दोनों का बचपन तकलीफों में बीता, दोनों को अपने पिता की नाजायज संतान होने के ताने सहने पड़े, दोनों संघर्ष की आग में तपकर कुंदन हो गईं। मुफलिसी से जूझते हुए दक्षिण की फिल्मों की एक्स्ट्रा कलाकार पुष्पावल्ली ने जब अपनी चार साल की बेटी भानुरेखा गणेशन से फिल्मों में काम करवाना शुरू किया था, तो उन्होंने कल्पना नहीं की होगी कि यह बच्ची आने वाले समय में न सिर्फ उनकी भाग्य रेखा बदल देगी, बल्कि सिनेमा में भी एक्टिंग की कई बड़ी रेखाएं खींच देगी।

रेखा 10 अक्टूबर को 66 साल की हो जाएंगी। इन 66 साल में से 62 साल उन्होंने ‘लाइट, कैमरा, एक्शन’ के बीच गुजारे हैं। जेम्स बॉण्ड के फार्मूले वाली तमिल फिल्म ‘ऑपरेशन जैकपॉट नल्ली’ बतौर नायिका उनकी पहली फिल्म थी। तब वे सिर्फ 14 साल की थीं। इस फिल्म में देशी बॉण्ड गर्ल के रूप में उनके लटके-झटके देखकर निर्देशक मोहन सहगल ने उन्हें ‘सावन भादो’ की नायिका बनाया, तो मुम्बई की फिल्म इंडस्ट्री में कइयों को हैरानी हुई कि बेहद सांवली, मोटी और हिन्दी नहीं जानने वाली इस लड़की पर सहगल क्यों दांव लगा रहे हैं। जैसे-जैसे फिल्में मिलती गईं, रेखा खुद को बदलते हुए उन्हें और हैरान करती गईं। हिन्दी के साथ-साथ उर्दू और अंग्रेजी भी वे फर्राटे से बोलने लगी थीं।

यह भी पढ़ें: एक्र्टेस Shikha Malhotra 6 महीने से कर रहीं थी कोविड-19 मरीजों की सेवा, खुद हो गईं कोरोना पॉजिटिव

रेखा ने जब हिन्दी फिल्मों में कदम रखा था, तब हेमा मालिनी, जीनत अमान, जया बच्चन आदि की कामयाब पारी चल रही थी। रेखा ने आंखें मूंदकर फिल्में साइन कीं। जाहिर है, इनमें से ज्यादातर कमजोर फिल्में थीं। फिर भी जो फिल्में चलीं, उनके दम पर उनकी मांग बनी रही। फिर वह दौर भी आया, जब हेमा मालिनी की धर्मेंद्र से शादी के बाद रेखा शीर्ष पर जा पहुंचीं। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी कामयाबी के मामले में पूर्ववर्ती धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की जोड़ी से चार कदम आगे निकल गई। ‘दो अनजाने’ में दोनों साथ आए। यह साथ ‘आलाप’, ‘सुहाग’, ‘गंगा की सौगंध’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘खून पसीना’, ‘मि. नटवरलाल’, ‘राम बलराम’ से लेकर ‘सिलसिला’ तक चला।

यह भी पढ़ें: रिलेशन कन्फर्म होने से 1 महीने पहले Neha Kakkar और रोहनप्रीत का हो गया था रोका! देखें वायरल तस्वीर

फिल्म-दर-फिल्म रेखा की अदाकारी के रंग लगातार खिलकर उभरते रहे। किरदार को सलीके से जीने के हुनर ने उन्हें श्रीदेवी के आगमन तक हिन्दी सिनेमा की सबसे व्यस्त नायिका बनाए रखा। ‘घर’, ‘खूबसूरत’, ‘उमराव जान’, ‘सिलसिला’, ‘उत्सव’, ‘खून भरी मांग’ जैसी कई फिल्में उनकी लाजवाब अदाकारी के लिए याद की जाती हैं।

यह भी पढ़ें: कौन हैं सपना चौधरी के पति Veer Sahu, सपना के मां बनने के बाद क्यों भड़के ट्रोल्स पर

वक्त के साथ रेखा और बदल चुकी हैं। अपनी बिंदास छवि वे इस उम्र में भी साथ लेकर चलती हैं, लेकिन अब उन्होंने बोलना कम कर दिया है। मेहदी हसन और आबिदा परवीन की गजलें वे पहले भी सुनती थीं। इन दिनों कुछ ज्यादा सुनती हैं। शायद मेहदी हसन की गजल ‘जो चाहते हो सो कहते हो, चुप रहने की लज्जत क्या जानो’ सुनकर उन्होंने यह सलीका हासिल किया है कि हर बात पर बोलने से चुप रहना ज्यादा बेहतर है।





Source link

Posts You May Love to Read !!

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *